Pillar of True Journalism to save Public Domain

Friday, September 26, 2014

निठारी कांड की पड़ताल: जिद्द और जुनून की रोमांचक दास्तां

निठारी के कथित नर पिशाच सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा जब टली तो मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। इस दौरान उसकी मां ने उससे मेरठ जेल में मुलाकात की। पहली बार उसके परिवार की तरफ से उसे फंसाए जाने की बात कही गई। निठारी में इस घिनौने कांड के खुलासे से लेकर कोली की फांसी की सजा के एलान के बीच कई सवाल खड़े हुए। मुख्य आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी किए जाने और कोली द्वारा सारे गुनाह मान लेने जैसी बातों ने मन में संशय पैदा कर दिया। नोएडा में निठारी के नर पिशाच की शिकार ज्योति का भाई अर्जुन सच्चाई जानने के लिए हम निकल नोएडा के निठारी गांव पड़े, जहां बच्चों और महिलाओं के साथ खूनी खेल खेला गया था। यहां पीड़ित परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों...

Tuesday, September 16, 2014

विश्वास बोले- BIGG BOSS के लिए होती है 'डील'

टीवी रियलटी शो बिग बॉस में सब कुछ पहले से फिक्स होता है। प्रतियोगी अपने मन मुताबिक कमरे में रह सकता है। अपने साथ डायरी-पेन रख सकता है। एंट्री से पहले अपने हिसाब से शो के नियम-कानून भी बदलवा सकता है। 'आप' नेता और कवि डॉ. कुमार विश्वास का कहना है कि उनको शो में शामिल होने का जब तीसरी बार न्योता मिला, तो उन्होंने कुछ शर्तें रखीं। इनमें से कुछ को बिग बॉस रियलिटी शो की निर्माता कंपनी एंडेमॉल और कलर्स टीवी ने मान लिया, लेकिन बात जब पैसों पर आई तो कंपनी ने किनारा कर लिया। dainikbhaskar.com से खास बातचीत में डॉ. कुमार विश्वास ने बताया कि उन्हें इस शो में शामिल होने के लिए बीते तीन साल से ऑफर आ रहे थे, पर वह मना कर देते थे। इस बार न्योता मिलने...

Monday, March 4, 2013

एक मिशन की निलामी?

ट्रेन अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी। खचाखच भरे हुए उस डिब्बे के एक कोने में किसी तरह जगह मिल सकी थी। मेरे सामने बैठे एक सज्जन अपने बगल में बैठे दूसरे सज्जन से लगभग चीखते हुए बोल रहे थे- 'अरे मेरा भतीजा पत्रकार बनना चाहता है। इसके लिए उससे 1500 रुपए बतौर सिक्युरिटी मांगा जा रहा है।' दूसरे सज्जन ने बड़े उत्सुकता से पूछा- 'पत्रकार बनने से क्या फायदा है?' पहले सज्जन सचेत हुए फिर गर्व से बोले- ''आपको पता नहीं! पत्रकार बनने वाले को सिक्‍युरिटी देने के बाद एक परिचय पत्र मिलता है। इसे दिखाकर किसी भी अफसर से यह पूछा जा सकता है कि अमुक काम क्यों, कैसे और कब हुआ और क्यों नहीं हुआ? टिकट के लिए कतार में नहीं लगना होता, कभी-कभी तो यात्रा करने के लिए टिकट...

दिल नहीं, जरा दिमाग से सोचिए जनाब...

लोग कितने भावुक और मूर्ख हैं। जिधर हवा चली, उधर हो लिए। मीडिया ने जो कहा वही मान लिए। कुंडा में गांव वालों ने डीएसपी की हत्या की, तो लोगों ने राजा भैया को दोषी ठहरा दिया। बिना यथास्थिति जाने हवाबाजी करने लगे। मीडिया ने भी अपना फैसला सुना दिया। अब जरा उस स्थिति का अंदाजा लगाइए...गांव में विवाद होता है। उसमें ग्राम प्रधान की हत्या हो जाती है। इससे लोग पहले से ही उग्र हैं। उन्हें प्रशासन द्वारा समझाने या कूटनीतिक तरीके से नियंत्रण करने की बजाए पुलिस गोली चलाती है। मृतक ग्राम प्रधान के भाई की गोली लगने से मौत हो जाती है। ऐसे में भीड़ और उग्र नहीं होगी तो क्या होगा। वो पुलिस पर हमला नहीं करेंगे तो क्या करेंगे। अरे आप यूपी पुलिस का बर्बर चेहरा...

Tuesday, November 27, 2012

आम आदमी की यह अजब दास्तान

उस दिन भी रोज की तरह बगीचे में टहल रहा था। मन में अजब बेचैनी थी। तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे। तभी मेरी नजर एक पके आम पर पड़ी। आम को देखते ही जाने क्यों आम आदमी का ख्याल आ गया। भाषण, लेख, हिदायतों और नसीहतों के बीच बचपन से ही आम आदमी के बारे में सुनता आ रहा हूं। लगा कि भले बदलाव की तेज आंधी ही क्यूं न चले, पर आम आदमी के हाथ न कभी कुछ लगा है, न लग पाएगा। जब आम आदमी का जिक्र आता है तो मन में एक अजीब सहानुभूति आ जाती है। मैं सोच में डूबा सड़क पर आ गया। सोचा चलो आज सबसे पूछते हैं कि ये आम आदमी है कौन? सामने मोटरसाइकिल दनदनाते दरोगाजी दिख गए। दुआ-सलाम के बाद उनसे पूछ ही लिया आम आदमी के बाबत। आम आदमी का नाम आते ही साहब लार टपकाते बोले - आम आदमी यानी...

Thursday, November 15, 2012

विरोध की बिसात पर फहराया राजनीतिक परचम

मराठियों के 'नायक' तो उत्तरभारतीयों के लिए 'खलनायक' रहे हैं ठाकरे बंधु। राजनीति के शेर बाल ठाकरे शनिवार दोपहर 3:30 बजे सदा के लिए शांत हो गए। चमत्कार की आस लगाए मातोश्री के बाहर खड़े लाखों शिवसैनिकों का भरोसा टूट गया। 86 साल के ठाकरे 14 नवंबर से ही बेहोशी की हालत में थे। सेहत सुधर रही थी, लेकिन दिल के दौरे ने सारी उम्मीदें तोड़ दी। रविवार को उनका अंतिम संस्कार हुआ है।  अपने कैरियर की शुरुआत एक कार्टूनिस्ट के रूप में करने वाले ठाकरे को उत्तर भारतीयों के खिलाफ घृणा और विरोध के लिए याद किया जाता है। उनका संपूर्ण राजनीतिक कैरियर हिन्दू और मराठी के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। उनकी राजनीतिक विचारधारा उपने पिता केशव सीताराम ठाकरे से काफी...

Monday, October 29, 2012

'मीडिया ट्रायल की बात निराधार'

ट्रायल मुकदमे का होता है, आरोपी का होता है, वह भी जांच के बाद। ट्रायल अदालत में होता है, वह भी तब जबकि पुलिस या ऐसी कोई अन्य राज्य शक्तियों से निष्ठ संस्था मामला वहां ले जाए या अदालत स्वयं संज्ञान लेकर जांच कराए। ट्रायल के बाद किसी को सजा मिलती है, तो कोई छूट जाता है। बहुस्तरीय न्याय व्यवस्था होने के कारण कई बार नीचे की अदालतों का फैसला ऊपर की अदालतें खारिज ही नहीं करतीं बल्कि यह कहकर कि निचली अदालत ने कानून की व्याख्या करने में भूल की, फैसला उलट भी देती हैं। ऐसा भी होता है कि कई बार सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालय के फैसले को न केवल उलट देता है बल्कि निचली अदालत की समझ की तारीफ भी करता है। तात्पर्य यह कि जहां सत्य जानने और जानने के बाद अपराधी...

Sunday, October 28, 2012

मीडिया की ताकत!

आज समाज में विश्वास का संकट है. हर संस्था या इससे जुड़े लोग अपने कामकाज के कारण सार्वजनिक निगाह में हैं. इसलिए मौजूदा धुंध में मीडिया को विश्वसनीय बनने के लिए अभियान चलाना चाहिए. इस दिशा में पहला कदम होगा, ईमानदार मीडिया के लिए नया आर्थिक मॉडल, जिसमें मुनाफा भी हो, शेयरधारकों को पैसा भी मिले, निवेश पर सही रिटर्न भी हो और यह मीडिया व्यवसाय को भी अपने पैरों पर खड़ा कर दे. यह आर्थिक मॉडल असंभव नहीं है. मीडिया की ताकत क्या है? अगर मीडिया के पास कोई शक्ति है, तो उसका स्रोत क्या है? क्यों लगभग एक सदी पहले कहा गया कि जब तोप मुकाबिल हो, तो अखबार निकालो? सरकार को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है. न्यायपालिका अधिकारों के कारण ही विशिष्ट है. विधायिका की...

Tuesday, October 23, 2012

हाईप्रोफाइल मच्छर: डेंगू का 'डंक'

डेंगू नामक बीमारी को कौन नहीं जानता है? हर साल हजारों लोग इस बीमारी के शिकार होते हैं। लेकिन इन दिनों डेंगू कुछ ज्यादा ही हाईप्रोफाइल हो गया है। इसने देश के जाने-माने फिल्मकार यश चोपड़ा को डंक मारने का दुस्साहस किया है। उसके डंक की चोट से यश जी तो चले गए, लेकिन देश में चर्चा का विषय छोड़ गए। चारों तरफ डेंगू की चर्चा हो रही है। कभी इसे गरीबों की बीमारी मानकर दुत्कार दिया गया था, अब इससे बड़े-बड़े लोग डरने लगे हैं। डेंगू फेसबुक और ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा है। यश जी की मौत से ज्यादा पब्लिसिटी बटोर चुका है। बताते चलें कि पूरे भारत में अब तक 17 हजार से अधिक डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। देश में इस साल अब तक 100 से अधिक मौते डेंगू से हो चुकी...

Wednesday, October 3, 2012

सचान-आरुषि मर्डर: CBI की 'साख' पर सवाल

सीबीआई को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी माना जाता है। किसी भी घटना में तह तक जाने या इंसाफ पाने के लिए उस पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है। यही कारण है कि जब भी कोई वारदात या घोटाला होता है तो लोगों की जुबां पर सीबीआई का नाम होता है। पर यूपी के दो सबसे चर्चित और सनसनीखेज मुद्दों पर उसकी नाकामी अब उसके विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर रही है।  सचान और आरुषि हत्याकांड का केस जब सीबीआई को सौंपा गया तो लोगों को आस बंधी कि अपराधी जरूर पकड़े जाएंगे। पर 14 महीने की जांच के बाद डॉ सचान केस में कुछ भी नया सबूत नहीं मिला। सीबीआई ने मामले में क्‍लोजर रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि डॉ वाइएस सचान की हत्‍या के सबूत नहीं मिले हैं। इसी तरह से आरुषि हत्‍याकांड...
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