राहुल जब यात्रा पर निकलने वाले थे तो पूरा यूपी 'जवाब हम देंगे' की होर्डिंग से पटा पड़ा था। राहुल ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि आपकी परेशानियों पर जवाब हम देंगे। यहां तो लोगों को जवाब देना तो दूर अपने कार्यकर्ताओं तक को जवाब नहीं दिया गया। राहुल ने कहा कि आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों की रीढ़ तोड़ देने वाला यूपी अब दूसरे राज्यों की ओर देख रहा है। परप्रांत में जाकर विकास में अपनी मेहनत मजदूरी से योगदान दे रहा है। बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता। पर खुद ही राहुल और उनके दिग्गज साथी महंगाई जैसे मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए थे। जब खुद के कार्यकर्ताओं ने मंहगाई का मुद्दा उठाया तो खामोशी की चादर ओढ़ ली। सिद्धार्थनगर में गांव के लोगों ने रोका तो राहुल मुस्कराते हुए गाड़ी से उतरे। वहीं एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कहा कि ‘महंगाई को लेकर बहुत किरकिरी हो रही है, कुछ कीजिए। वर्ना जनता जीने नहीं देगी।’ इस मुस्कराते हुए राहुल मौन रहे। कोइ प्रतिक्रिया नही दी। आम आदमी की यह अजब दास्तान
मैंने तो सोचा था कि आम आदमी वह है, जो पैसों की गर्मी से फैलता और कमी से सिकुड़ता है। जो महंगाई की आहट से कांप जाता है। आम आदमी तो दुखों का ढेर है। अभावों का दलदल है। मुकम्मल बयान है, चेहरे पर दर्द का गहरा निशान है।
बज गई चुनावी रणभेरी चढ़ गईं उनकी त्योरियां
बज गई चुनावी रणभेरी चढ़ गईं उनकी त्योरियां नाचने लगी उनकी आंखें बजने लगे उनके गाल बढ़ गई गरीबों की पूछ आम आदमी हुआ खास.
Sunday, November 27, 2011
ऐसे ही बचते रहे 'युवराज' तो बची हुई सीटें ही आएंगी 'हाथ'!
राहुल जब यात्रा पर निकलने वाले थे तो पूरा यूपी 'जवाब हम देंगे' की होर्डिंग से पटा पड़ा था। राहुल ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि आपकी परेशानियों पर जवाब हम देंगे। यहां तो लोगों को जवाब देना तो दूर अपने कार्यकर्ताओं तक को जवाब नहीं दिया गया। राहुल ने कहा कि आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों की रीढ़ तोड़ देने वाला यूपी अब दूसरे राज्यों की ओर देख रहा है। परप्रांत में जाकर विकास में अपनी मेहनत मजदूरी से योगदान दे रहा है। बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता। पर खुद ही राहुल और उनके दिग्गज साथी महंगाई जैसे मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए थे। जब खुद के कार्यकर्ताओं ने मंहगाई का मुद्दा उठाया तो खामोशी की चादर ओढ़ ली। सिद्धार्थनगर में गांव के लोगों ने रोका तो राहुल मुस्कराते हुए गाड़ी से उतरे। वहीं एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कहा कि ‘महंगाई को लेकर बहुत किरकिरी हो रही है, कुछ कीजिए। वर्ना जनता जीने नहीं देगी।’ इस मुस्कराते हुए राहुल मौन रहे। कोइ प्रतिक्रिया नही दी। Wednesday, October 5, 2011
ये है माया की 'माया': जिसने भी लगाई इज्जत की बाट, उसकी खड़ी कर दी खाट!
यूपी की मुख्यमंत्री मायावती का तेवर इन दिनों देखते ही बन रहा है। पिछले कुछ महिने के हालात पर गौर करें तो माया के फैसलों ने न केवल लोगों को चौंकाया है, बल्कि विपक्षी पार्टियों के हाथ से भी चुनावी मुद्दा करीब छीन लिया है। हाल ही में माया ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र तथा श्रम मंत्री बादशाह सिंह को मंत्री पद से तब तक के लिए हटा दिया है, जब तक की ये दोनों मंत्री जांच में निर्दोष साबित नहीं हो जाते। इससे पहले भी वह कई मंत्रियों, बसपा कार्यकर्ताओं और अधिकारियों को दंडित या पदच्यूत कर चुकीं हैं। चुनाव से एन वक्त पहले मायावती का यह रुख चौंकाने वाला है। कोई इसे ऑपरेशन क्लीन का नाम दे रहा है, तो कोई राजनीतिक स्टंट।जिसने भी लगाई इज्जत की वाट, उसकी खड़ी कर दी खाट
मायावती ने बहुजन समाज पार्टी की छवि को धक्का पहुंचाने वालों को बिना माफ किए तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया। मई 2007 में राज्य की चौथी बार बागडोर सम्भालने मायावती ने अपने कार्यकाल के दौरान 26 प्रभावशाली लोगों को सरकार या पार्टी से निकाल बाहर किया है। इस हिट लिस्ट में तमाम मंत्री, सांसद, विधायक, पार्टी के बडे पदाधिकारी शामिल हैं। लोगों का मानना है कि माया पार्टी या सरकार की छवि को धक्का पहुंचाने वालों को वह बर्दाश्त नहीं करतीं हालांकि निकालने से पहले वह चेतावनी जरुर दे देती हैं। हाल में सांसद धनंजय सिंह और विधायक योगेन्द्र सागर के निलंबन और विधायक अशोक चन्देल की पार्टी से बर्खास्तगी से उन्होंने सबसे पहला झटका सांसद उमाकांत यादव को दिया था। फैजाबाद जिले के मिल्कीपुर विधानसभा सीट से विधायक आनन्द सेन यादव का खाद्य प्रसंस्करण मंत्री बनाने के कुछ ही महीनो बाद शशि नाम की युवती के अपहरण मामले में नाम आने पर उन्हें तत्काल मंत्री पद से हटा दिया था।
करीबी लोगों को भी नहीं बक्शा
ऐसा माना जाता है कि मायावती कुछ मामलों में अपने करीबियों को भी नहीं छोड़ती। प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला देने वाले दो-दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की हत्या के बाद मायावती ने अपने सबसे नजदीकी मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और अनन्त कुमार मिश्र को भी एक झटके में मंत्रिमंडल से निकाल दिया। उनके साथ ही भूमि विकास एवं जल संसाधन मंत्री अशोक कुमार दोहरे, मुस्लिम एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री विद्या चौधरी. सूचना मंत्री सुधीर गोयल. राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त पन्ना लाल कश्यप. राज्य मंत्री रघुनाथ प्रसाद शंखवार. राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त इन्तजार आब्दी से भी अलग अलग समय पर विभिन्न वजहों से इस्तीफे ले लिये गये।
विकीलीक्स के तूफान से भी नहीं डगमगाई
मायावती अपने मजबूत इच्छाशक्ति के कारण विकीलीक्स के तूफान को भी यूं ही झेल गईं। इस केबल ने दावा किया था कि मायावती को 'अव्वल दर्जे की अति अहंकारी' है। इन पर प्रधानमंत्री बनने की धुन सवार है। अमरीकी कूटनयिकों की ओर से भेजे गए इस दस्तावेज़ में मायावती के धन एकत्रित करने के तरीक़ों पर चर्चा की गई है और साथ ही उनके व्यवहार की भी। केबल ने माया के करीबियों को भी दगाबाज बताया था। इनके सबसे विश्वासपात्र सतीश चंद्र मिश्र पर भी आरोप लगाया था। पर माया ने विकीलीक्स के आरोपो को बकवास बताते हुए निराधार बताया था।
मायावती को कोई राजनीतिक विरासत नहीं मिली है। उन्होंने अपने दम चार बार मुख्यमंत्री की गद्दी हासिल की है। दलितों की महारानी नाम से ख्यात माया ने कभी भी परिस्थितियों से समझौता नहीं किया है। इनके जीवन में जितने बार तूफान आया, उतनी बार उभरी हैं। एक राजनेता से ज्यादा एक महिला के रूप में मायावती की तारीफ होनी चाहिए।
तथ्य साभार दैनिक भास्कर डॉट कॉम


8:46 PM
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